NARAYAN THE GOD
This is a platform for those who know about the god or want to know about the god.....Share your experiences about god....
Tuesday, December 14, 2010
Saturday, July 5, 2008
Thanks for your interest
Dear Brothers and Sisters,
I appreciate that you are taking interest to know about the Bhagwan (God) . It is very important to tell you that if u concern about god god automatically concern for you. So please always remember Bhagwan . In my next post i will tell you something about Dharma and Karma .
So Remember God and Enjoy life.
Your always
Santram Das
I appreciate that you are taking interest to know about the Bhagwan (God) . It is very important to tell you that if u concern about god god automatically concern for you. So please always remember Bhagwan . In my next post i will tell you something about Dharma and Karma .
So Remember God and Enjoy life.
Your always
Santram Das
Monday, June 30, 2008
Monday, June 23, 2008
"कलयुग केवल नाम अधारा "
नमो: नारायनाये:
नाम जाप की जो महीमा कलयुग के लीए बताई गई है उसके अनुसार भगवन के नाम का सुमीरण करना ही वो सूत्र है जीसके द्वारा भगवन की प्राप्ती की जा सकती है रामायण में गोस्वामी जी कहते हैं "कलयुग केवल नाम अधारा " और फीर नाम लेने मैं नुकसान ही क्या है ये तो ऐसा काम है जीसे चलते फीरते कोई भी कभी भी कर सकता है....कोई बंधन नहीं समय का, स्थान का
जपते जाओ और आनंद उठाओ
आपके सवालों के लीए सदैव तैयार
आपका संत राम दास
नाम जाप की जो महीमा कलयुग के लीए बताई गई है उसके अनुसार भगवन के नाम का सुमीरण करना ही वो सूत्र है जीसके द्वारा भगवन की प्राप्ती की जा सकती है रामायण में गोस्वामी जी कहते हैं "कलयुग केवल नाम अधारा " और फीर नाम लेने मैं नुकसान ही क्या है ये तो ऐसा काम है जीसे चलते फीरते कोई भी कभी भी कर सकता है....कोई बंधन नहीं समय का, स्थान का
जपते जाओ और आनंद उठाओ
आपके सवालों के लीए सदैव तैयार
आपका संत राम दास
Sunday, June 15, 2008
आपके प्रशन पढ़ कर लगा के आप लोग ये सब जानने के लीए उतावले हें तो पहले मैं आप को ये बता दूँ के भगवान् सब जगह है,.. सभी मैं है ,और सभी भगवन मैं ही हें समझने के लीए शरणागत होना पड़ेगा !अपना सब कुछ उसी की कृपा से प्राप्त मानना होगा! अपने कर्तापन को खत्म करना होगा ये वीचार की ये सब मेरे द्वारा हो रहा है छोड़ना होगा !तब आप पहली सीढी पर खड़े होंगे !रही बात अच्छे या बुरे कर्मो की तो जब तक आप आपने आप को ही करता मानते है तब तक आप ही पाप और पुण्य के भागी होते हैं और जब आप शरणागत हो जाते हैं तो भगवन के द्वारा ही सब कार्य सीद्ध होते हैं उस समय कोई भी कार्य पाप माय नही हो सकता ! समझने के लीए कुछ सूत्र हें सबसे पहले किसी संत की शरण में जन होगा तब वो आपको शरनागत कराएगा या रासता दीखायेगा धीरे धीरे आप कुपात्र से सुपात्र होंगे तब कही जाकर आप भगवन की शरण मैं समर्पण होंगे !दूसरा सूत्र है के लगातार भगवन shri हरी के नम का स्मरण किया जाए जो अप पर परसन हो कर आपको ख़ुद ही अपनी शरण में ले लेंगे और आपको पता ही नही चलेगा कब काया पलट हो गया!
आगे भी आपसे इसी तरेह सहयोग की आशा करता हूँ भगवन नारायण की कृपा से आपको आपके प्रश्नों के उत्तर आपको मीलते रहें!
सब पर नारायण संत कृपा बनी रहे
आपका
संत राम दस
आगे भी आपसे इसी तरेह सहयोग की आशा करता हूँ भगवन नारायण की कृपा से आपको आपके प्रश्नों के उत्तर आपको मीलते रहें!
सब पर नारायण संत कृपा बनी रहे
आपका
संत राम दस
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